Wednesday, February 17, 2016

अमर प्रेम कहानी का साक्षी मांडू ऐतिहा‍सिक इमारतों का स्थान मांडू

ऐतिहा‍सिक इमारतों का स्थान मांडू

स्वागत करते प्रवेश द्वार : मांडू में लगभग 12 प्रवेश द्वार है, जो मांडू में 45 किलोमीटर के दायरे में मुंडेर के समान निर्मित है। इन दरवाजों में 'दिल्ली दरवाजा' प्रमुख है। यह मांडू का प्रवेश द्वार है। इसका निर्माण सन् 1405 से 1407 के मध्य में हुआ था। यह खड़ी ढाल के रूप में घुमावदार मार्ग पर बनाया गया है, जहां पहुंचने पर हाथियों की गति धीमी हो जाती थी।


इस दरवाजे में प्रवेश करते ही अन्य दरवाजों की शुरुआत के साथ ही मांडू दर्शन का आरंभ हो जाता है। मांडू के प्रमुख दरवाजों में आलमगीर दरवाजा, भंगी दरवाजा, रामपोल दरवाजा, जहांगीर दरवाजा, तारापुर दरवाजा आदि अनेक दरवाजे हैं।

जामा मस्जिद (जामी मस्जिद) : मांडू का मुख्य आकर्षण जामा मस्जिद है, इस विशाल मस्जिद का निर्माण कार्य होशंगशाह के शासनकाल में आरंभ किया गया था तथा महमूद प्रथम के शासनकाल में यह मस्जिद बनकर तैयार हुई थी। इस मस्जिद की गिनती मांडू की नायाब व शानदार इमारतों में की जाती है। यह भी कहा जाता है कि जामा मस्जिद डेमास्कस (सीरिया देश की राजधानी) की एक प्रसिद्ध मस्जिद का प्रतिरूप है। 

अशरफी महल : जामा मस्जिद के सामने ही अशरफी महल है। अशरफी का अर्थ होता है 'सोने के सिक्के'। इस महल का निर्माण होशंगशाह खिलजी के उत्तराधिकारी मोहम्मद खिलजी ने इस्लामिक भाषा के विद्यालय (मदरसा) के लिए किया था। यहां विद्धार्थियों के रहने के लिए कई कमरों का निर्माण भी किया गया था।

जहाज महल : जहाज महल का निर्माण 1469 से 1500 ईस्वी के मध्य कराया था। यह महल जहाज की आकृति में दो कृत्रिम तालाबों कपूर तालाब व मुंज तालाब दो तालाबों के मध्य में बना हुआ है। लगभग 120 मीटर लंबे इस खूबसूरत महल को दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानों तालाब के बीच में कोई सुंदर जहाज तैर रहा हो। संभवत: इसका निर्माण श्रृंगारप्रेमी सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने विशेष तौर पर अंत:पुर (महिलाओं के लिए बनाए गए महल) के रूप में किया था। 
होशंगशाह की कब्र : होशंगशाह की कब्र, जो कि भारत में मार्बल से बनाई हुई ऐसी पहली कब्र है, जिसमें आपको अफगानी शिल्पकला का बेहतर नमूना देखने को मिलता है। यह यहां का गुंबज, बरामदे तथा मार्बल की जाली आदि की खूबसूरती बेजोड़ है।

हिंडोला महल : हिंडोला महल मांडू के खूबसूरत महलों में से एक है। हिंडोला का अर्थ होता 'झूला'। इस महल की दीवारे कुछ झुकी होने के कारण यह महल हवा में झुलते हिंडोले के समान प्रतीत होता है। अत: इसे हिंडोला महल के नाम से जाना जाता है। हिंडोला महल का निर्माण ग्यासुद्दीन खिलजी ने 1469 से 1500 ईस्वी के मध्य सभा भवन के रूप में निर्मित सुंदर महल है। यहां के सुंदर कॉलम इसे और भी खूबसूरती प्रदान करते हैं। इस महल के पश्चिम में कई छोटे-बड़े सुंदर महल है। इसके समीप ही चंपा बाबड़ी है।

रानी रूपमती का महल : रानी रूपमती के महल को देखे बगैर मांडू दर्शन अधूरा सा है। 365 मीटर ऊंची खड़ी चट्टान पर स्थित इस महल का निर्माण बाजबहादुर ने रानी रूपमती के लिए कराया था। इसी के साथ ही सैनिकों के लिए मांडू की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के बेहतर स्थान के रूप में भी इसका प्रयोग किया जाता था।

कहा जाता है कि रानी रूपमती सुबह ऊठकर मां नर्मदा के दर्शन करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करती थी। अत: रूपमती के नर्मदा दर्शन को सुलभ बनाने हेतु बाजबहादुर ने ऊंचाई पर स्थित इस महल का निर्माण कराया था।

बाज बहादुर का महल : बाज बहादुर के महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में किया गया था। इस महल में विशाल आंगन व हॉल बने हुए हैं। यहां से हमें मांडू का सुंदर नजारा देखने को मिलता है।

अन्य स्थल-

रेवा कुंड : रेवा कुंड का निर्माण बादशाह बाजबहादुर ने अपनी प्रेयसी रानी रूपमती के महल में पानी 

की पर्याप्त व्यवस्था के स्त्रोत के रूप में किया था।

नीलकंठ : यहां शिवजी का मंदिर है जिसमें जाने के लिए अंदर सीढ़ी उतरकर जाना पड़ता है। 

इस मंदिर के सौंदर्य को शब्दों में बयां नहीं किया सकता। ऊपर पेड़ों से घिरे तालाब से एक धार 

नीचे शिवजी का अभिषेक करती जाती है।

नीलकंठ महल : मंदिर के समीप स्थित इस महल का निर्माण शाह बदगा खान ने अकबर की हिंदू 

पत्नी के लिए करवाया था। इसकी दीवारों पर अकबर कालीन कला के नमूने देखे जा सकते हैं।

हाथी महल : दरिया खान की मजार, दाई का महल, दाई की छोटी बहन का महल, मलिक मघत 

की मस्जिद और जाली महल भी दर्शनीय हैं। यहां ईको पॉइंट पर पर्यटकों की भीड़ लगी ही रहती है। 

लोहानी गुफाएं और उनके सामने स्थित सनसेट पॉइंट भी पर्यटकों को खींचता है।

मांडू से दूरी :धार से दूरी - लगभग 33 किलोमीटर



इंदौर से दूरी - लगभग 100 किलोमीटर

नजदीकी रेलवे स्टेशन - इंदौर व रतलाम

बस सुविधा उपलब्ध : रतलाम, उज्जैन, भोपाल, महू, धार आदि स्थानों से मांडू हेतु डेली बस सुविधा उपलब्ध है।


मांडू जाने का बेहतर समय : जुलाई से मार्च माह का समय मांडू जाने के लिए बेहतर स्थान है।

बेहतर होगा कि आप बरसात के मौसम में मांडू जाएं क्योंकि इस मौसम में मांडू की खूबसूरती 

चरम पर होती है।

ठहरने के स्थान :


मांडू में म. प्र. पर्यटन विभाग का होटल मालवा रिर्जोट है। इसके अलावा मांडू में कई छोटे-बड़े 

होटल व धर्मशालाएं हैं, जहां आप ठहरकर मांडू के खूबसूरत नजारों का आनंद उठा सकते हैं।


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